मुकदमें का ब्रीफ तैयार कैसे करे :-

क्रीमवुड मियर्स के निम्न विचार है :-

1. मुकदमों के तथ्यों के विषय में सामान्य परिचय प्राप्त करने के बाद एडवोकेट को सर्वप्रथम अपनी संचिका या फ़ाइल को एरेन्ज करके उसके प्रत्येक पृष्ट को संख्याकित कर लेना चाहिए ।
2.  तैयार किये जानेवाले फाइल पर दोनों पक्षों के नाम रेखाकित भी कर लेना चाहिए जिसका केस आपको मिला रहता है। उसके नीचे अपने दस्तावेजों की सूची भी लिख ले और साथ-साथ गवाहों के नामों की सूची भी तैयार कर लें।
3. उसो कागज पर तालिकाबद्ध विवरणी तैयार करें जिसमें चार खाने हो । एक में तारीख दूसरे में साचित किये जानेवाले फैक्ट्स तीसरे में कब और किससे साबित कराये जायें और चौथे में प्रसंग कॉलम न०-2 महत्वपूर्ण फैक्ट्स को साबित करने के लिए विशिष्टता होनी चाहिए अर्थात् प्रकाश में लाने के लिए बल दिये जाये और वे बातें जो आपक पक्ष में हो उन्हें नीली  रोशनाई से अन्डर लाईन कर दं और जो आपके प्रतिकुल दिखे  उन्हें लाल से अन्डर लाईन कर दें । उसके बाद आपके गवाहान और उन्हें जो कुछ भी साबित करना है उन सभी बातों को अगले कॉलम में नोट करें । महत्वपूर्ण बातो को अनिवार्यताएँ जैसे किसी मुकदमें में बिक्री की बाते रहती है जहां आपको दस्तावेज साबित करना है, उस बात का भी वहां दर्ज कर दें ।
4. कानून को बात लिखी जाने कालम में अध्ययन के बाद आप चुने हुए केस  के शब्दा में केस के फैक्टस या लॉ  को ठीक  फिट करनेवाली कानूनी धारा को लिख डाले  जिन्हें आप साबित करना चाहत है या प्रसंग का हवाला देत है ।
5. विपक्षी के मुकदमे को डील करने में सोच विचार करन के बाद आपको मुकदमे के मूल प्रश्न तथा प्रतिपरीक्षण के उस लाईन पर पहुँचना है जिसको आपको उनके गवाहों के प्रतिपरीक्षण में अपनाना है । मूल प्रश्नों को भी पूछना अनुचित नहीं है जिससे कि व्यस्तता के दिन में आप महत्वपूर्ण बात का पूछना भले नहीं अथवा आपसे  छूटे नहीं ।

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आपराधिक मामलों में अध्ययन एवं तैयारी सिविल केसों की अपेक्षा क्रिमिनल केसों में मौखिक साक्ष्य बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण पार्ट अदा करता है । सिविल मुकदमे  की अपेक्षा क्रिमिनल केसों में परिस्थिति जन्य साक्ष्यां का क्षेत्र मोटे तौर पर बहुत बड़ा होता है । प्रथम आवश्यकता जो वकील को सावधानी पूर्वक देखना चाहिए और अधिक निपूणता से चलना चाहिए । वह है साक्ष्य की संख्या जो उपलब्ध होने लायक हो या दूसरे शब्दों में उसकी गुणवता जो कितना अधिक है और उसका कौन हिस्सा प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य है । इसलिए इसको आरम्भ करने के साथ प्रत्येक वकील को अपने से बार-बार प्रयत्न करते रहना चाहिए कि साक्ष्य कौन-कौन हैं ? कौन-कौन परिस्थितियाँ है ? क्या साबित करना है ? वे क्या साबित करते हैं ? किस प्रकार साबित करते हैं ? अत: प्रथम नियम यह है कि एफ०आई० आर० को पढ़े या परिवाद-पत्र को एक भी शब्द को हटाये बिना सावधानी पूर्वक अध्ययन करें । दूसरी सावधानी और महत्वपूर्ण वस्तु जो वकील के ध्यान को संलग्न करे वह है घटना कब और कहाँ हुई? इन प्रश्न का उत्तर एफ० आई० आर०  दे  देता है , महत्वपूर्ण है यदि दोनों के बीच को देरी असाधारण है या उस संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं है तो यह एक अच्छा प्रतिरक्षा प्रदान करता है  क्रिमिनल (आपराधिक) केस की तैयारी के लिए सबसे जरूरी है - एफ० आई० आर० का बहुत सावधनी से पढ़ना और अभियुक्त या साक्षियों के नामों का लोप, उसे करने में देरी, कहानी में किया गया सुधार, एफ० आई० आर० में सहायक बिन्दु है, जिनपर प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार निर्भर करता है । दुर्घटना, तथ्य की भूल इत्यादि बातों पर ध्यान देना चाहिए जिससे अपने पक्ष में बचाव किया जा सके । चार्ज-शाट को बड़े ध्यान से पढ़ना चाहिए । मेडिकल सर्टिफिकेट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विश्लेषण करना चाहिए कि मेडिकल सर्टिफिकंट एवं पोस्टमार्टम में वर्णित चोटं उन यारों द्वारा पहुंचाई जा सकती है जो आपके मुवक्किल द्वारा जख्म पहुँचाने की बात कही गयी है । सामान्यतः डाक्टर, मजिस्ट्रेट और एडवोकेट हड्डियों के कटने की गहरी चोट व्यवहार करते हैं जो गलत है । गहरी चोट की परिभाषा के अनुसार हड्डी का टूटना गहरी चोट है न कि कटना। प्रत्येक गवाह का अपना अपना इतिहास होता है, इसलिए प्रॉसिक्यूशन साक्षियों का लिस्ट बनाना चाहिए और देखना चाहिए कि सूचक के  परिवार का संबंधी है या मित्र है या आपके मुवक्किल का दुश्मन है। घटना का समय एवं घटना स्थल पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि घटना के समय पहचान के लिए पर्याप्त प्रकाश था कि नहीं साक्षियों द्वारा पुलिस के समझ दिये गये बयानों में भिन्नता नोट कर लेना चाहिए कि प्रतिपरीक्षण करने में सुविधा हो और गवाहों से पुलिस के समक्ष दिये गये बयानों एवं न्यायालय के समक्ष दिये गये बयानों में विरोधाभास साबित किया जा सके । अपने मुवक्किल को निदोष साबित करने में जो भी प्रतिरक्षा ले वह प्रोसिक्यूशन द्वारा कथित परिस्थिति के साथ फिट बैठना चाहिए जिससे आप अपनी प्रतिरक्षा प्रमाणित कर सके। रसायन परीक्षक की रिपोर्ट को ध्यान से पढ़कर अपने लाभ की बात को नोट कर लेना चाहिए। ट्रायल फंस करने के पूर्व ही अभियुक्त की ओर से लड़ने के लिए सावधानी पूर्वक योजना बना लेनी चाहिए 

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