सिविल प्रक्रिया संहिता
सन् 1859 की सिविल प्रक्रिया संहिता अनेकों बार संशोधित की गई सन् 1877 में संशोधित सिविल प्रक्रिया संहिता देश का कानून बन गई लेकिन परिस्थितियों में परिवर्तनों के साथ-साथ इसमें और संशोधनों की आवश्यकता प्रतीत हुई । इसलिए सन् 1908 में इनमें और संशोधन किये गये एवं आज हमारे समक्ष सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 है। लेकिन देरी तथा व्यय को कम करने के उद्देश्य से संहिता में सन् 1956 में संशोधन किये गये और संशोधित अधिनियम को 2 दिसम्बर, 1956 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली तथा पहली जनवरी, 1957 को इन्हें लागू किया गया। सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के दो भाग हैं-प्रथम भाग और द्वितीय भाग । प्रथम भाग में 158 धाराएं हैं। इसे संहिता का मुख्य अंग कहते हैं । प्रथम भाग सामान्य सिद्धांतों का उल्लेख करता है तथा इन्हीं व्यवस्थाओं के आधार पर क्षेत्राधिकार निर्धारित किया जाता है। प्रथम भाग प्रकृति से सारभूत है जो संसद के सिवाय किसी के द्वारा परिवर्तित या संशोधित नहीं किया जा सकता है । द्वितीय भाग में 51 आदेशों का संकलन है। इसे प्रथम अनुसूची में रखा गया है। इन आदेशों को नियम कहते हैं। द्वितीय भाग में क...