न्यायिक प्रक्रिया में उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों का प्रभाव

भारत के संविधान की अनुच्छेद 151 का प्रोविजन है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा घोषित नियम या सिद्धान्त भारत के राज्य-क्षेत्रान्तर्गत सभी न्यायालयों पर लागू होगा । उसी प्रकार किसी उच्च न्यायालय का कोई निर्णय उसी कोर्ट के किसी डिवीजन बेंच तथा उसके अधीनस्थ सभी न्यायालयों पर भी लागू होगा । एक उच्च न्यायालय का निर्णय यद्यपि दूसरे न्यायालय पर बाइन्डिंग नहीं है तथापि अत्यधिक आदरणीय रहता है । अधीनस्थ न्यायालय अपने उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धान्त के अर्थ का अनुसरण करने में बँधे हुए है जहाँ इसके अपने उच्च न्यायालय का कोई निर्णय नहीं है वहाँ निचला न्यायालय अन्य उच्च न्यायालयों के निर्णयों का अनुशरण करता है । उच्च न्यायालय का अप्रतिवेदित फैसला भी अथोरिटी के रूप में उतना ही अच्छा है जितना रिपोर्टेड होता है । इस सम्बन्ध में एक ख्याति प्राप्त न्यायाधीश ने माना है कि फैसला कमो-वेश एक अथोरिटी है भले ही उसको रिपोर्ट नहीं किया गया । यह हमेशा अवश्य स्मरण रखा जाना चाहिए कि कोई भी फैसला कानून को बदल नहीं सकता रिपोर्ट एक अथॉरिटी  के रूप में प्रयोग उस समय होता है जब उसमें कतिपय लीगल प्रिन्सिपुल्स स्पष्ट रूप से निर्णीत होते हैं न कि मान्यता लिए अन्य मुकदमों के सामानान्तर तथ्यों पर| 

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