बुनियादी बातें

मैंने सन 2011 से वकालत कर रहा हूँ काफी उतार चढ़ाव देखने के बाद नए अधिवक्ताओं के लिए यह ब्लॉग मैंने बनाया और अपने अनुभव आपसे साझा कर रहा हूँ | जो लोग विधि व्यवसाय का चुनाव अपनी पसंद से करते है एवं दृढ़ संकल्प के साथ जाखिम को जानते हुए इस व्यवसाय में आते हैं वे हो इस पेशे  में सफल हो पाते हैं। जो व्यक्ति अपना धैर्य खो देता है ते इस पेशा में टिक नहीं पाता है इस पेशे में नये अधिवक्ताओं को बड़े धैर्य का साथ गहन अध्ययन करते हुए प्रतीक्षाकाल व्यतीत करना चाहिए क्योंकि एक न एक दिन सभी को चमकने का अवसर मिलता है प्रत्येक अधिवक्ता को प्रतिदिन न्यायालय में पहले पहुँच जाना चाहिए और न्यायालय बद होने के बाद आना चाहिए । एक अधिवक्ता को पेटु  पाठक अवश्य होना चाहिए । लॉर्ड बाउथम के अनुसार-एक अधिवक्ता  को कुछ विषय के बारे में सब कुछ और प्रत्येक चीज के बार में कुछ चीज अवश्य जानना चाहिए। वकालत करना पत्थर में शहद निकालने के समान है । सिर्फ लॉ की डिग्री और कोर्ट के पहन लेने से सफलता नहीं मिल पाती प्रत्येक सफलता के बाद सफलता का मापदंड बदल जाता है । हकीकत तो यह है कि क्लाइंट अधिवक्ता के कानून की जानकारी वं डिग्री में रुची नहीं रखता । कलाइन्ट  की रूचि मात्र केस  जितने में होती है। इसलिए अधिवक्ता को प्रयास करना चाहिए कि वह अपने कलाइन्ट का केस को किसी भी शर्त पर जीते । वकालत की सफलता भाग्य पर नहीं कठिन परिश्रम पर  है । अधिवक्ताओं की कानून के साथ- साथ संसारिक मामलों का भी ज्ञान होना चाहिए कानून अथाह समुद्र है जिसकी पूर्ण जानकारी इस जिन्दगी  संभव नहीं है   वर्तमान

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